पुस्तक विवरण
भारतीय साहित्य में श्री राधा
भारतीय संस्कृति, भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र में स्थित श्री राधा के बहुआयामी स्वरूप का गहन, शोधपरक एवं साहित्यिक अध्ययन प्रस्तुत करती यह महत्वपूर्ण कृति “भारतीय साहित्य में श्री राधा” भारतीय वाङ्मय की एक मूल्यवान धरोहर है। यह पुस्तक श्री राधा के साहित्यिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक स्वरूप को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का एक गंभीर प्रयास है।
इस ग्रंथ में देश के विभिन्न विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं साहित्यकारों द्वारा लिखित 37 शोधपरक आलेख संकलित किए गए हैं, जिनमें वैदिक एवं पौराणिक साहित्य से लेकर भक्ति काल, रीतिकाल, आधुनिक हिंदी साहित्य तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं में राधा के स्वरूप, विकास और प्रभाव का विस्तृत विवेचन किया गया है।
श्री राधा को केवल भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिया के रूप में नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण, विरह, भक्ति, करुणा, सौंदर्य और आध्यात्मिक उत्कर्ष की सर्वोच्च प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक यह दर्शाती है कि किस प्रकार राधा भारतीय साहित्य की आत्मा बनकर युगों-युगों से कवियों, संतों, कलाकारों और साधकों को प्रेरित करती रही हैं।
इस पुस्तक में सूरदास, विद्यापति, जयदेव, रसखान, हरिऔध तथा अन्य साहित्यकारों की रचनाओं में राधा के स्वरूप का विश्लेषण किया गया है। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा, भक्ति साहित्य, लोक साहित्य, आधुनिक साहित्य तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं में राधा के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव को भी विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों, अध्यापकों, साहित्य प्रेमियों, भारतीय संस्कृति के अध्येताओं तथा राधा-कृष्ण भक्ति परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं संग्रहणीय ग्रंथ है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ
✔ 37 शोधपरक एवं मौलिक आलेखों का संग्रह।
✔ भारतीय साहित्य में राधा के विकास का व्यापक अध्ययन।
✔ भक्ति, दर्शन, संस्कृति और साहित्य के विविध आयामों का समावेश।
✔ शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं अध्यापकों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ।
✔ भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राधा-तत्त्व को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत।
पुस्तक विवरण
पुस्तक का नाम: भारतीय साहित्य में श्री राधा
संपादक: डॉ. मुक्ता अग्रवाल एवं डॉ. शशि वल्लभ शर्मा
प्रकाशक: सद्भावना पब्लिकेशन, अम्बाह (म.प्र.)
ISBN: 978-81-999701-8-2
संस्करण: प्रथम संस्करण, 2026
भाषा: हिन्दी
मूल्य: ₹500/-
“राधा केवल एक पात्र नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण की वह शाश्वत अनुभूति हैं, जो भारतीय साहित्य और संस्कृति को सदैव आलोकित करती रही है।”






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